Saturday, 20 February 2021

कुछ माहौल, कुछ आप

सोने से सन से बुनी हुई सुनहरी धूप
मलमल में लिपटी सर्दी की धूप
ठण्ड के टूटे कतरों में हल्की गर्म लौ
हवा में सरसराती सुलाती हुई धूप
धीमे से जगमगाती, जिसे देख नींद आती
अपने आग़ोश में फुसला कर
मुहब्बत से सहला कर
ऊँघने की सलाह देती नर्म धूप 


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