Soapsuede
Tuesday, 16 March 2021
जाँ
बादल रात भर बरसते रहे
हम आपके किए तरसते रहे
यह कुम्हलाया हुआ आज का दिन
फिर भी इस क़दर जलता नज़र आता है
जब भी हमारा वह पिघलता हुआ लम्हा
दीवानों की तरह ज़हन में आता है
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
View mobile version
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment