Soapsuede
Tuesday, 24 August 2021
अब आ भी जाइए
बादल गरजते रहे
बिजली बेइंतिहा कौंध कर
थक कर तड़प कर
कालिख पुती घटाओं में दम तोड़ कर
किसी भटके पेड़ की राह में छटक के गिर गयी
बरसात के इंतिज़ार में यूँ इंतक़ाल हो जाएगा
हम थक के मिट जाएँगे
बारिश का बहाना हो जाएगा
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