अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
कहाँ थे रात को हम से ज़रा निगाह मिले
तलाश में हो कि झूटा कोई गवाह मिले
-दाग़ देहलवी
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा
मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा
-बशीर बद्र
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है
बेवफ़ाई कभी कभी करना
बशीर बद्र
आरज़ू है कि तू यहाँ आए
और फिर उम्र भर न जाए कहीं
नासिर काज़मी
दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं
याद इतना भी कोई न आए
-कैफ़ी आज़मी
चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है
हसरत मोहानी
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
अकबर इलाहाबादी
बात बस से निकल चली है
दिल की हालत सँभल चली है
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दिल में अब यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं
जैसे बिछड़े हुए काबे में सनम आते हैं
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़