Tuesday, 27 July 2021

इर्शाद

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया 
वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे 
जो इश्क़ को काम समझते थे 
या काम से आशिक़ी करते थे 
हम जीते-जी मसरूफ़ रहे 
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया 
काम इश्क़ के आड़े आता रहा 
और इश्क़ से काम उलझता रहा 
फिर आख़िर तंग आ कर हम ने 
दोनों को अधूरा छोड़ दिया 

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


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